क्या सोचा कभी
कर्म आस्रव का कारण क्या ?
कर्मास्रव का मुख्य कारण असंयम
हिंसा—झूठ—चोरी—अब्रह्म और परिग्रह
यही पांच दोष असंयमी होने के कारण बनते
इनसे निवृति जो करते वो संयमी कहलाते .....
क्रोध—मान—माया—लोभ
ये चार कषाय जीव के बताये
जिनके कारण आत्मा विभाव परिणमन में वर्तते
जिनमे क्रोध और मान है द्वेष रूप
माया और लोभ है राग रूप
राग—द्वेष के भाव ही जीव के
कर्मबंध में सहायक बने .....
इसलिये जो साधक
आस्रव और बंध के कारण जानकर
मिथ्यात्व को तजकर
उनसे निवृति का उद्यम करे
वही नवीन कर्मबंध से विराम पावे
वही कालांतर में संसार भ्रमण से
मुक्ति पाये ....
अपने ज्ञानानंद स्वभावी आत्मा का
वो चिरकाल तक अनुभवन पावे
इतना ही जाना सरलता से
मैंने मुक्ति पाने का उपाय ....
*" करो दिलसे सजदा तो इबादत बनेगी ,*
ReplyDelete*मॉ बाप की सेवा अमानत बनेगी...,*
*खुलेगा जब तुम्हारे गुनाहों का खाता,*
*तो मॉ बाप की सेवा जमानत बनेगी..."*